होर्मुज़ संकट पर ईरान का बड़ा बयान: “मजबूत हैं ईरानी, जीत हमारी होगी”
जौनपुर । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट का केंद्र बन गया है। ये बाते जौनपुर में शिया कालेज के मैदान में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई की मजलिस को संबोधित करने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई के प्रतिनिधि आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने मीडिया से बातचीत करते ईरान का पक्ष रखा है।
“ईरानी जनता डटी है, जीत करीब”
आयतुल्लाह इलाही ने दावा किया कि देश की स्थिति “बहुत अच्छी” है और ईरानी जनता बेहद मजबूत होकर सड़कों पर डटी हुई है। उन्होंने कहा कि लोग न केवल संघर्ष का सामना कर रहे हैं, बल्कि जीत के लिए तैयार हैं और जल्द विजय का जश्न मनाने की उम्मीद कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह संघर्ष आत्मसम्मान और स्वतंत्रता का प्रतीक बन चुका है।
भारी जनहानि और तबाही का दावा
ईरानी प्रतिनिधि ने संघर्ष में बड़े पैमाने पर नुकसान का दावा करते हुए कहा कि अब तक 4,000 से अधिक निर्दोष लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 7 से 12 वर्ष की 175 बच्चियां भी शामिल हैं।
इसके अलावा 1 लाख से अधिक घरों के क्षतिग्रस्त होने और 50 से ज्यादा विश्वविद्यालयों व अस्पतालों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
“28 फरवरी के बाद बदले हालात, 1500 जहाज़ फंसे”
उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से पहले तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला था और अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही सामान्य थी। लेकिन ईरान पर हुए हमलों के बाद हालात बिगड़े और वर्तमान में करीब 1500 जहाज़ तथा 2000 से अधिक चालक दल के सदस्य इस मार्ग में फंसे हुए हैं।
इलाही ने दोहराया कि यह संकट ईरान की वजह से नहीं, बल्कि युद्ध शुरू करने वाली ताकतों के कारण उत्पन्न हुआ है।
अमेरिका पर आरोप, मंशा पर सवाल
संयुक्त राज्य अमेरिका पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी वास्तविक समझौते के लिए गंभीर नहीं है और ऐसी शर्तें रखता है जिन्हें ईरान कभी स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका 7,000 मील से अधिक दूरी तय कर ईरान पर हमला करता है और इसका उद्देश्य तेल की कीमतों को नियंत्रित करना तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन अपने पक्ष में करना है।
इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “अच्छी बातचीत” वाले बयान पर भी सवाल उठाए गए और इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया गया।
परमाणु कार्यक्रम पर सफाई
ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं और न ही वह इन्हें बनाना चाहता है। इसे देश की सैन्य नीति से बाहर बताया गया।
आयतुल्लाह इलाही ने कहा कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई पहले ही परमाणु हथियारों को “हराम” घोषित कर चुके हैं, जिससे ईरान की नीति स्पष्ट हो जाती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
संघर्ष के चलते तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। इलाही ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां अपने आर्थिक हितों के लिए इस संकट को बढ़ावा दे रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के कारण हथियार और ड्रोन उद्योग को बढ़ावा मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संघर्ष से कुछ वर्गों को सीधा लाभ हो रहा है।
वार्ता, अविश्वास और युद्धविराम
ईरान की ओर से कहा गया कि वह तत्काल युद्धविराम के लिए तैयार है, लेकिन दूसरी ओर से सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे हैं।
अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए इलाही ने कहा कि पूर्व में कई समझौते तोड़े गए, जिससे भरोसे का संकट गहरा गया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
अंत में ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयास करे और युद्ध के बजाय संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता दे।

