मानसिक स्वास्थ्य—एक उभरता हुआ वैश्विक संकट और वैज्ञानिक समाधान की नई उम्मीद:डॉ हरिनाथ यादव।Don News Express
July 01, 2026
मानसिक स्वास्थ्य—एक उभरता हुआ वैश्विक संकट और वैज्ञानिक समाधान की नई उम्मीद* जौनपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ एक महामारी का रूप ले चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आज दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार के साथ जी रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का वैश्विक आर्थिक बोझ 6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, जो कैंसर, मधुमेह और सांस की बीमारियों के संयुक्त आर्थिक बोझ से भी अधिक होगा। 'श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय' के डायरेक्टर, डॉ. हरिनाथ यादव (एम.बी.बी.एस., एम.डी. न्यूरोसाइकियाट्री) ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉ. यादव के साथ हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिजोफ्रेनिया, मेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। डिजिटल युग और युवाओं पर मानसिक प्रहार आज की युवा पीढ़ी 'डिजिटल एडिक्शन' के मकड़जाल में फंसी है। डॉ. यादव ने बताया कि मोबाइल इंटरनेट, सोशल मीडिया, और ऑनलाइन गेमिंग की लत युवाओं में एकाग्रता की कमी, नींद के विकार और अवसाद को बढ़ावा दे रही है। शोध बताते हैं कि किशोर जो प्रतिदिन तीन घंटे से अधिक सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, उनमें अवसाद और एंग्जायटी का खतरा दोगुना हो जाता है। इसके अलावा, कार्यशील पीढ़ी (Working Population) में अत्यधिक तनाव और एंग्जायटी का प्रकोप बढ़ रहा है, जबकि बुजुर्ग आबादी में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) जैसी समस्याएँ एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं। अत्याधुनिक उपचार: श्री कृष्णा न्यूरो में विज्ञान का समावेश डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारियों को कलंक या भूत-प्रेत का साया समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। 'श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय' में इन गंभीर बीमारियों का उपचार अब अत्यंत आधुनिक वैज्ञानिक विधियों से संभव है। यहाँ बिना किसी चीर-फाड़ के इलाज के लिए निम्नलिखित अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं: rTMS (रिपिटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन): मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करने के लिए प्रभावी, जो मूड और व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। बायोफीडबैक (Biofeedback): यह तकनीक मरीज को अपनी शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करना सिखाती है। मल्टी बिहेवियर थेरेपी (MBT): व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक विशेष उपचार विधि। सटीक जांच: रोग की सही पहचान के लिए संस्थान में EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राम) और NCS (नर्व कंडक्शन स्टडी) जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। डॉ. यादव ने अंत में यह संदेश दिया कि समय पर वैज्ञानिक उपचार ही एकमात्र रास्ता है जिससे हम इस मानसिक महामारी को मात देकर एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण कर सकते हैं।

