डॉ. आरएन त्रिपाठी होटल के बेटर को पीएचडी कराकर आए थे सुर्खियों में ।Don News Express

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 डॉ. आरएन त्रिपाठी होटल के बेटर को पीएचडी कराकर आए थे सुर्खियों में 

राजेश श्रीवास्तव (संपादक शिराज़ ए हिन्द .कॉम)

जौनपुर। सच्चा गुरु वही होता है, जो शिष्य की परिस्थितियों को नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और संभावनाओं को देखता है। जो कठिन परिस्थितियों में भी छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सफलता की राह दिखा दे। यह गुरु है जगत गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के नए कुलपति प्रोफेसर डॉ आर एन त्रिपाठी।


दरअसल, जब डॉ. आरएन त्रिपाठी टीडी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे, उस दौरान नेपाल के रहने वाले रमेश थापा नगर के एक नामी होटल में बेटर की नौकरी करते थे। नौकरी के साथ-साथ वह टीडी कॉलेज में अपनी पढ़ाई भी कर रहे थे। काम की व्यस्तता और सीमित परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा हासिल करने के प्रति उनकी लगन ने डॉ. त्रिपाठी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने रमेश की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।


डॉ. त्रिपाठी के मार्गदर्शन ने रमेश थापा के भीतर छिपी संभावनाओं को नई दिशा दी। पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना जारी रखा। गुरु के निर्देशन में उन्होंने शोध कार्य किया और पीएचडी की उपाधि हासिल की। समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने शैक्षणिक क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की। आज वह नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।


रमेश थापा की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस शिक्षक के योगदान का भी उदाहरण है, जो अपने विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर रहता है। डॉ. आरएन त्रिपाठी ने रमेश में उस प्रतिभा को देखा, जिसे परिस्थितियां शायद आम नजरों से ओझल कर सकती थीं। होटल में काम करते हुए पढ़ाई करने वाले एक छात्र का विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनना बताता है कि उचित मार्गदर्शन, दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम से जीवन की दिशा बदली जा सकती है।


जगत गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के नए कुलपति डॉ. आरएन त्रिपाठी मूल रूप से जौनपुर जिले की बदलापुर तहसील के बुढ़नेपुर गांव के निवासी हैं। वर्ष 2015 तक वह टीडी पीजी कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे। इसके बाद उनकी नियुक्ति काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में हुई। वह उच्च शिक्षा आयोग और लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वह बीएचयू में सेवारत हैं। चित्रकूट दिव्यांग विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में भी उनका नाम चर्चा में है।


डॉ. त्रिपाठी का शैक्षणिक सफर और रमेश थापा की सफलता से जुड़ा यह प्रसंग शिक्षा जगत में शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करता है। एक शिक्षक का प्रभाव कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके मार्गदर्शन से तैयार हुए विद्यार्थी देश-विदेश में ज्ञान की रोशनी फैलाते हैं।

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