पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर उठे सवाल, अभ्यर्थी ने लगाया अनियमितताओं का आरोप।Don News Express

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 पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर उठे सवाल, अभ्यर्थी ने लगाया अनियमितताओं का आरोप



जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (वीबीएसपीयू) के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत ने विश्वविद्यालय की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बदलापुर तहसील के राजबाजार भोगीपुर निवासी अभ्यर्थी अजय कुमार मौर्य ने पीयूसीआरईटी-2024 (PUCRET-2024) के तहत हुई पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और पूरी प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की है।

शिकायत संख्या 40019426036483 में अजय मौर्य ने आरोप लगाया है कि कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग में पीएचडी प्रवेश के दौरान आरक्षण नियमों का समुचित पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कुछ अभ्यर्थियों को अनारक्षित (यूआर) श्रेणी में समायोजित कर प्रवेश दिया गया, जबकि उनकी मूल श्रेणी और पात्रता स्पष्ट रूप से निर्धारित थी।

शिकायतकर्ता का दावा है कि एक अभ्यर्थी ने ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था और उसका नेट प्रमाणपत्र भी उसी श्रेणी का था, बावजूद इसके उसे अनारक्षित वर्ग में समायोजित कर लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसा किस नियम और आधार पर किया गया।


कम अंक वालों का चयन, अधिक अंक पाने वालों की अनदेखी का आरोप

अजय मौर्य ने आरोप लगाया है कि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जबकि अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में मेरिट के साथ न्याय नहीं हुआ और इसी कारण कई योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा।


सभी को 70 अंक मिलने पर उठे सवाल


शिकायत में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। अजय मौर्य का कहना है कि उपलब्ध स्कोर कार्ड के अनुसार लिखित प्रवेश परीक्षा में लगभग सभी अभ्यर्थियों को  70 अंक प्रदान किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि किसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों को समान अंक मिलना कैसे संभव है।

उनका कहना है कि यदि सभी को समान अंक दिए गए तो फिर चयन का आधार क्या रहा और अंतिम मेरिट किस प्रकार तैयार की गई। इस बिंदु पर उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की है।


मेरिट सूची और वेटिंग सूची सार्वजनिक न करने का आरोप


शिकायतकर्ता के अनुसार पूरी चयन प्रक्रिया गोपनीय तरीके से संपन्न की गई। विभाग ने न तो विभागीय मेरिट सूची सार्वजनिक की और न ही वेटिंग सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड की। इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों के लिए बनाए गए आधिकारिक व्हाट्सएप समूह में भी चयन प्रक्रिया से संबंधित कोई स्पष्ट सूचना साझा नहीं की गई।

अजय मौर्य का कहना है कि पारदर्शिता के अभाव ने अभ्यर्थियों के बीच संदेह और असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है।


विश्वविद्यालय ने आरोपों को किया खारिज


मामला आईजीआरएस तक पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिलाधिकारी को भेजे गए अपने जवाब में कहा है कि पीयूसीआरईटी-2024 के अंतर्गत कंप्यूटर एप्लीकेशन विषय की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय अध्यादेश-2022 के अनुरूप संपन्न कराई गई है।

विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव द्वारा भेजे गए पत्र में शिकायत को निस्तारित किए जाने का अनुरोध किया गया है। हालांकि शिकायतकर्ता इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग पर कायम हैं।

ये हैं शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें

कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग की संपूर्ण डीआरसी एवं आरडीसी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए।

प्रवेश प्रक्रिया की वीडियोग्राफी, मेरिट सूची एवं समस्त अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

संपूर्ण चयन प्रक्रिया पुनः पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाए।

विभागीय मेरिट सूची एवं चयन सूची सार्वजनिक रूप से विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी की जाए।


शिकायत में लगाए गए आरोप यदि सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। वहीं विश्वविद्यालय का दावा सही पाए जाने पर विवाद पर विराम लग सकता है।

फिलहाल यह मामला विश्वविद्यालय परिसर से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत में उठाए गए सवालों की जांच होती है या मामला कागजी जवाबों तक ही सीमित रह जाता है।

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