*मूक महामारी' से एक 'नई उम्मीद' और उदासी से रोशनी की ओर*
*श्री कृष्णा न्यूरो एंड मेंटल हेल्थ क्लिनिक में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशाल जन जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन*
जौनपुर: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित 'श्री कृष्णा न्यूरो एंड मेंटल हेल्थ क्लिनिक' में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष संगोष्ठी एवं जन जागरूकता कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में मानसिक बीमारियों को लेकर फैले भ्रम को दूर करना और लोगों को सही समय पर इलाज के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर क्लिनिक के संस्थापक एवं शहर के वरिष्ठ मनोचिकित्सक (न्यूरो-साइकिएट्रिस्ट) डॉ. हरिनाथ यादव ने मानसिक बीमारियों के प्रकार, उनके बढ़ते खतरे और बचाव के बारे में लोगों को विस्तार से जानकारी दी।
[संदर्भ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) - मेंटल हेल्थ अवेयरनेस एंड एंटी-स्टिग्मा कैंपेन गाइडलाइन्स]
जनसमूह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. हरिनाथ यादव ने बताया कि आज मानसिक बीमारियाँ पूरी दुनिया में एक 'मूक महामारी' (Silent Epidemic) का रूप ले चुकी हैं। उन्होंने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि दुनिया भर में मानसिक बीमारियाँ अब विकलांगता (Disability) का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं। वर्तमान में दुनिया भर में करीब 120 करोड़ लोग मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं, और 1990 के बाद से इन मामलों में 95.5% की भयानक वृद्धि दर्ज की गई है, जो हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
[संदर्भ: द लैंसेट - 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' (GBD) रिपोर्ट, 2026]
देश में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से ग्रस्त है। इसका सीधा सा अर्थ है कि देश में करीब 19.7 करोड़ लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों (6.9%) की तुलना में शहरी क्षेत्रों (13.5%) में यह बीमारी लगभग दोगुनी रफ्तार से फैल रही है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और बदलती जीवनशैली इसका एक बहुत बड़ा कारण है।
[संदर्भ: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार - 'नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे' (NMHS) और द लैंसेट इंडिया रिपोर्ट]
उन्होंने बीमारियों के विस्तार पर बात करते हुए कहा कि भारत में उदासी (डिप्रेशन) और घबराहट (एंग्जायटी) के मरीज सबसे अधिक हैं। लगभग 4.57 करोड़ लोग डिप्रेशन और 4.49 करोड़ लोग एंग्जायटी का शिकार हैं। इसके अलावा समाज में शराब और नशे की लत (Substance Use) महामारी की तरह युवाओं को बर्बाद कर रही है। सिजोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी गंभीर बीमारियों के साथ-साथ, बच्चों में ऑटिज्म और ADHD के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने सचेत किया कि डिप्रेशन के मरीजों में हृदय रोग का खतरा 72% तक बढ़ जाता है।
[संदर्भ: ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) डेटा और क्लीनिकल को-मॉर्बिडिटी स्टडीज]
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती का जिक्र करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि आज भी देश में 70 से 90 प्रतिशत मानसिक रोगियों को कभी इलाज ही नहीं मिल पाता (ट्रीटमेंट गैप)। अंधविश्वास और कलंक (Stigma) के डर से लोग बीमारी छिपाते हैं। सही समय पर इलाज न मिलने के कारण मानसिक रोगियों में आम लोगों की तुलना में आत्महत्या का खतरा 16 गुना अधिक होता है, जिसे केवल वैज्ञानिक इलाज और जागरूकता से ही रोका जा सकता है।
[संदर्भ: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) सुसाइड डेटा 2023 और NMHS ट्रीटमेंट गैप रिपोर्ट]
कार्यक्रम के अगले चरण में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिमा यादव ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने मानसिक बीमारियों के इलाज में दवाइयों के साथ-साथ क्लीनिकल साइकोलॉजी की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. प्रतिमा ने मरीजों और उनके परिजनों को 'बिहेवियर थेरेपी' (Behavior Therapy) और 'साइकोलॉजिकल काउंसलिंग' (Psychological Counseling) के वैज्ञानिक फायदों के बारे में विस्तार से समझाया और बताया कि कैसे थेरेपी के जरिए विचारों की उलझन को दूर कर जीवन को सकारात्मक बनाया जा सकता है।
[संदर्भ: अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) - गाइडलाइंस फॉर साइकोलॉजिकल प्रैक्टिस एंड क्लिनिकल इंटरवेंशन]
इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. हरिनाथ यादव और डॉ. प्रतिमा यादव के साथ-साथ क्लिनिक के स्टाफ डॉ. सुशील, नितिन, लालजी, शिव बहादुर, समस्त नर्सिंग स्टाफ, बड़ी संख्या में मरीज एवं उनके परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति एकजुटता दिखाते हुए उपस्थित सभी अतिथियों, श्रोताओं और अस्पताल प्रबंधन का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

